बौद्ध धम्म के अनुसार मनुष्य की वास्तविक उन्नति तभी संभव है जब वह अपने भीतर शांति, करुणा और संयम का विकास करे। यही आंतरिक परिवर्तन परिवार, समाज और राष्ट्र की उन्नति का आधार बनता है। धम्म केवल व्यक्तिगत मुक्ति का मार्ग नहीं, बल्कि सर्वजन कल्याण का पथ है, जो समानता, मैत्री और मानवता की भावना को उजागर करता है। वर्तमान समय में, जब समाज अज्ञानता और असमानता जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, तब बौद्ध धम्म लोगों को सदाचार, करुणा और जागरूकता की दिशा में प्रेरित कर रहा है।
किन्तु कई लोग धम्म अपनाने के बाद भी पारिवारिक अवसरों—जैसे गर्भ मंगल, गृह प्रवेश, विवाह या अंतिम संस्कार—में बौद्ध पद्धतियों की जानकारी के अभाव में पुरानी परंपराओं की ओर लौट जाते हैं। इसलिए आवश्यक है कि धम्म के व्यवहारिक रूप को समझकर उसे दैनिक जीवन में अपनाया जाए।
यह ई-बुक उन बौद्ध अनुयायियों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है, जो अपने जीवन के महत्वपूर्ण संस्कारों को बौद्ध परंपरा के अनुसार मनाना चाहते हैं। गर्भ मंगल (गोद भराई) केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आने वाले शिशु को श्रेष्ठ मानवीय संस्कार देने की एक धम्ममय प्रक्रिया है। यह पुस्तक गर्भ मंगल संस्कार का एक सरल, वैज्ञानिक और बौद्धमय स्वरूप प्रस्तुत करती है, जो माता, शिशु और परिवार को सकारात्मकता, सद्भावना और आध्यात्मिक आधार प्रदान करता है।
इसमें त्रिशरण-पंचशील, परित्राण पाठ, शुभ संकल्प, ध्यान, आशीर्वाद और गर्भावस्था में मानसिक शुद्धता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को सरल भाषा में समझाया गया है। यह ई-बुक बौद्ध धम्म की जीवन-शैली को घर-परिवार और संस्कारों में व्यवहारिक रूप से अपनाने का श्रेष्ठ मार्गदर्शन देती है।
इस ई पुस्तक की मुख्य विशेषताएँ:
✔️ बौद्ध परंपरा पर आधारित गर्भ मंगल संस्कार का पूर्ण विवरण
✔️ माता व शिशु के लिए मानसिक और आध्यात्मिक लाभ
✔️ त्रिशरण, पंचशील और परित्राण पाठ का सरल मार्गदर्शन
✔️ परिवार द्वारा लिए जाने वाले शुभ संकल्प व सकारात्मक वातावरण निर्माण
✔️ धम्ममय जीवन-शैली अपनाने के इच्छुक सभी लोगों के लिए उपयोगी
✔️ आसान भाषा, व्यवहारिक सुझाव और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
यह पुस्तक उन सभी बौद्ध अनुयायियों के लिए एक मार्गदर्शक है, जो अपने घर-परिवार में शांति, करुणा और समानता आधारित धम्म-जीवन पद्धति स्थापित करना चाहते हैं। इसे आज ही खरीदें!





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