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बुद्ध के धम्म का वास्तविक स्वरूप
अक्सर यह देखा जाता है कि विभिन्न धर्मों के संस्थापक अपने संदेश को ईश्वरीय बताते हैं। जैसे गीता में श्रीकृष्ण स्वयं को ईश्वर घोषित करते हैं और गीता को भगवान के वचन माना जाता है। उसी प्रकार ईसा ने स्वयं को ईश्वर का पुत्र होने का दावा किया। इसके विपरीत, तथागत बुद्ध ने अपने लिए ऐसा कोई दावा कभी नहीं किया। उन्होंने न तो स्वयं को ईश्वर का पुत्र कहा, न ही अपनी शिक्षाओं को ईश्वरीय आदेश बताया। बुद्ध ने केवल इतना कहा था कि

बौद्ध धम्म: चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग और पंचशील का व्यावहारिक मार्गदर्शन
बौद्ध धम्म: चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग और पंचशील का व्यावहारिक मार्गदर्शन भूमिका: बौद्ध धम्म की ओर बढ़ता मानव समाजआज के समय में लोगों के बीच बौद्ध धर्म को जानने और समझने की रुचि तेजी से बढ़ रही है। इसके परिणामस्वरूप समाज में एक नई चेतना और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया जा रहा है। यह ऊर्जा मानव-मानव के बीच मैत्री, समानता, समरसता और मानवता के भाव को मजबूत कर रही है। यह सब संभव हो पा रहा है बौद्ध धम्म के ज्ञान और उसकी

युग पुरुष डॉ भीम राव अंबेडकर
भारतीय इतिहास में 14 अप्रैल 1891 वह स्वर्णिम दिन है, जिसने सदियों से अज्ञानता और अन्याय के अंधकार में डूबे समाज के लिए एक नया सवेरा लाया। इसी दिन हमारे मार्गदर्शक और भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म हुआ। उनका जीवन केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि संघर्षों की एक ऐसी महागाथा है जिसने आधुनिक भारत की नींव रखी। बचपन और छुआछूत का दंश: बाबा साहब का बालमन उन सवालों से जूझता था जिनका जवाब उस समय के समाज के पास नहीं था।स्कूल में उन्हें

डॉ. आंबेडकर और अनुच्छेद 370
डॉ. आंबेडकर और अनुच्छेद 370: ऐतिहासिक तथ्य, विवाद और वास्तविक भूमिका भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 लंबे समय तक राजनीतिक, संवैधानिक और वैचारिक बहस का केंद्र रहा है। अक्सर यह दावा किया जाता है कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने इस अनुच्छेद का विरोध किया था और इसे उनकी इच्छा के विरुद्ध संविधान में शामिल किया गया। यह लेख इन्हीं दावों, ऐतिहासिक घटनाओं और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर एक विस्तृत, संतुलित और शोधपरक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अनुच्छेद 370 क्या था?: अनुच्छेद 370 के अंतर्गत

बुद्ध का धम्म क्या है?
बुद्ध का धम्म क्या है? आज के इस आधुनिक भारत में धर्म को लेकर जिस तरह का वातावरण बना हुआ है, जहाँ हर कोई अपने धर्म को इंसानियत से ऊपर मानकर उसे दूसरे से अच्छा और पुरातन सिद्ध करने में लगा है- उससे बौद्ध धर्म (बुद्ध का धम्म) भी अछूता नहीं रह पाया है। इसका दुखद परिणाम यह है कि भगवान बुद्ध और उनके मार्ग को मानने वाले अनेक लोग, जाने-अनजाने में, गलत और मिलावटी जानकारी को साझा कर रहे हैं। दूसरी ओर, बुद्ध के