इस ई-बुक में क्या विशेष है?
यह पुस्तक मात्र एक अनुष्ठान-विधि नहीं, बल्कि धम्म के मूल सिद्धांतों पर आधारित एक संपूर्ण जीवन-शैली को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसमें बताया गया है
कि नामकरण संस्कार क्यों और कैसे धम्म के अनुसार किया जाता है।
इसमे बौद्ध परंपरा के अनुसार जन्म से जुड़े संस्कारों का शुद्ध एवं सरल स्वरूप का पूरा वर्णन है।
इसमे चार आर्य सत्यों, अष्टांगिक मार्ग और मैत्री-करुणा-समानता के सिद्धांतों का पालन है।
इसमे रूढ़िवाद और पाखंड से पूरी तरह मुक्त वैज्ञानिक व तर्कसंगत नामकरण पद्धति का वर्णन है।
नई पीढ़ी को बौद्ध मूल्यों से जोड़ने का व्यावहारिक मार्ग है।
यह पुस्तक उन सभी के लिए अत्यंत उपयोगी है जो धम्म को केवल नाम से नहीं, बल्कि आचरण और संस्कारों में भी अपनाना चाहते हैं।
इस पुस्तक को क्यों खरीदें?
क्योंकि बौद्ध धम्म केवल ध्यान, प्रवचन या पूजा तक सीमित नहीं है।
यह जीवन के हर पहलू में उपस्थित है।
हमारे व्यवहार, संस्कार, उत्सव और परंपराओं में धम्म की रोशनी तभी आएगी जब हम उन्हें बुद्ध-पद्धति से अपनाएँगे।
नामकरण संस्कार धम्म-आधारित जीवन का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
यह ई-बुक आपको इस पूरी प्रक्रिया को समझने, अपनाने और अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का सरल, स्पष्ट और प्रामाणिक मार्ग देती है।





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